द आर्टिस्ट और अबला

 


2011 की फ्रेंच फ़िल्म है "द आर्टिस्ट", फ्रेंच सिर्फ़ इसलिए कि फ्रांस में बनी थी वरना तो ये ग्लोबल फिल्म है, क्योंकि फिल्म साइलेंट है। साइलेंट होने के साथ ब्लैक एंड व्हाइट भी है और तो और इसका aspect ratio भी 4:3 है, यानि पूरी तरह से ये 1930 की फिल्म है क्योंकि ये कहानी भी उसी दौर की है, to be more precise उसी दौर की फिल्मों की है।

फिल्म की कहानी है साइलेंट फिल्मों के सुपर स्टार जॉर्ज वेलेंटाइन की, और बदलते वक्त की। जॉर्ज साइलेंट फ़िल्मों का स्टार है और उसी वक्त बोलती फ़िल्मों का आगमन होता है। प्रोडक्शन हाउस घोषणा करता है कि अब वे सिर्फ़ बोलती फिल्में बनाएंगे लेकिन जॉर्ज इस नए आविष्कार को ख़ारिज कर देता है। उसके अनुसार बोलती फिल्में चल ही नहीं सकती, फिल्में साइलेंट ही अच्छी लगती हैं। हर परिवर्तन कुछ इसी तरह की प्रतिक्रियाओं में पनपता है। जब रंगीन फ़िल्में बननी शुरू हुई तब भी कुछ ऐसा ही कहा गया था कि रंग आँखों को distract करते हैं और फिल्म के भाव नहीं पहुँच पाते, पर आगे क्या हुआ हम सब जानते हैं, रंगों ने अपनी तरह भाव प्रदर्शित करना शुरू किया। 

बहरहाल, प्रॉडक्शन अपनी बोलती फिल्म बना रहा है जॉर्ज के बिना, और जॉर्ज अपने आप को सही सिद्ध करने के लिए ख़ुद एक साइलेंट फिल्म बनाता है। इस फिल्म में वो सब कुछ दांव पर लगा देता है। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज़ होती हैं और जॉर्ज की फिल्म देखने कोई नहीं आता। वो बर्बाद हो जाता है। इसी कहानी में बहुत ही प्यारी एक प्रेम कहानी गुंथी हुई है।


ये जो घटना है ऐसी ही एक घटना उस दौर में भारत में भी हुई थी। रावलपिंडी में पंजाब की पहली फिल्म कंपनी पंजाब फिल्म कंपनी, हीरामन सेठ ने बनाई और अपनी पहली मूक फिल्म "अबला" शुरू की। इस फिल्म के लिए हीरो बंगाल से लाया गया जबकि पंजाबी लोग दिखने में बहुत खूबसूरत होते थे। अपने को हीरो से ज्यादा हैंडसम मान बलराज साहनी भी सेट के चक्कर लगाते रहते थे। बलराज साहनी तब सिर्फ सोचा करते थे हीरो बनने के बारे में। जब फिल्म रिलीज़ के लिए तैयार हुई तब तक हव्वा खड़ा हो गया पहली बोलती फिल्म "आलम आरा" का। दोनों फिल्में एक साथ रिलीज हुई। जहां आलम आरा को देखने आए लोगों की भीड़ का अंत ही नहीं था, अबला के शो ख़ाली पड़े थे। रातों रात युग बदल गया था। हीरामन सेठ बर्बाद हो गए और कंपनी बंद हो गई। हालांकि उस वक्त के ज्ञानी लोगों के मुताबिक "अबला" टेक्निकली इतनी अच्छी थी कि हॉलीवुड को टक्कर देती थी, वहीं आलम आरा बहुत ही घटिया फिल्म थी।

बहरहाल, "द आर्टिस्ट" को ढेरों अवॉर्ड्स मिले जिसमें 5 ऑस्कर्स भी शामिल है। देखने को कहां मिल सकती है मुझे नहीं पता।

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