अनोरा - ऑस्कर की फजीहत

 


ये बिक गया है ऑस्कर।

और इस फिल्म की दुहाई देकर कान्ति शाह अपने लिए कम से कम राष्ट्रीय पुरस्कार की माँग तो कर ही सकते हैं। 

मैंने अपने जीवन का डेढ़ घंटा ख़राब किया सिर्फ़ इसलिए कि ऑस्कर मिला है भाई, कुछ तो होगा, देखते जाओ। आख़िर मेन उस मोड पर बंद की जब "अम्मा बहिन पर आ जाऊँगा" वाली स्थिति आन पहुँची थी। 

एक तो आजकल इन लोगों के लिए हर चीज़ फकिंग क्यों होती है? फोन, पानी, कार, और जो भी कुछ इस शृष्टि में है, सबका prefix यही फकिंग है। आप इसका हिन्दी तर्जुमा सोचिए और ये सोचिए कि आप एक फ़िल्म देख रहे हैं जिसमें हर एक संवाद में कम से कम दो बार उसे बोला जा रहा है, कैसा महसूस होगा? ऐसा लगेगा जैसे आपको ही कहा जा रहा है बार-बार और आप ढीठ की तरह सुने और देखे जा रहे हैं। 

"अनोरा" एक पॉर्न फ़िल्म है जिसमें एक कहानी घुसेड़ी गई है। कहने को ये एक prostitute की कहानी है लेकिन ऐसा कोई पहलू नहीं दिखाया गया है कि दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाने वाला ऑस्कर इसे दे दिया जाये। अगर इसे दिया है तो "चाँदनी बार" को कई ऑस्कर मिल जाने चाहिए, और तबु इस लड़की से कई गुना बेहतर अभिनेत्री हैं। 

फ़िल्म वैश्यावृत्ति के अड्डे पर शुरू होती है जहां एक अमीरज़ादा इवान पहुँचता है जो रूसी है। अनोरा को उसे हैंडल करने भेजा जाता है। इसके बाद सिलसिला शुरू होता है इवान की अय्याशीयों का जो ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेता। इतनी ड्रग्स ले चुके थे स्क्रीन पर वे लोग कि मुझे नशा महसूस होने लगा, तब मैंने देखा कितनी फ़िल्म हुई है। पता चला चालीस मिनट से मैं इनकी रंगरेलियाँ ही देख रहा हूँ, कहानी इंच भर नहीं सरकी है। मेरा मन किया बंद कर दूँ, पर ऑस्कर ने कहा रुक जा भाई, मेरा तो लिहाज कर तो फिर देखता रहा। कहानी 2 इंच आगे सरकी और फिर वहीं अटक गई। अगले चालीस घंटे कहानी के अगले पड़ाव पर गुज़ार दिये और फिर एक गाली देकर बंद कर दी। 

अब इस दुनिया में किसी चीज़ का भरोसा नहीं रहा। एक तरफ़ हम ऑस्कर का सम्मान करते हुए "लापता लेडिज" को उसके योग्य नहीं मानने को तैयार हो गए थे पर इसे देखते हुए तो हमारी लापता लेडिज बिलकुल ऑस्कर मिलने काबिल है। 

लानत है। 

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